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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    यत्र काले त्वनावृत्ति-
    मावृत्तिं चैव योगिनः ।
    प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥८- २३॥

    हे अर्जुन! जिस काल में (यहाँ काल शब्द से मार्ग समझना चाहिए, क्योंकि आगे के श्लोकों में भगवान ने इसका नाम 'सृति', 'गति' ऐसा कहा है।) शरीर त्याग कर गए हुए योगीजन तो वापस न लौटने वाली गति को और जिस काल में गए हुए वापस लौटने वाली गति को ही प्राप्त होते हैं, उस काल को अर्थात दोनों मार्गों को कहूँगा॥23॥

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Krishna Kutumb
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