Loading...

  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते ।
    एकया यात्यनावृत्ति-
    मन्ययावर्तते पुनः ॥८- २६॥

    क्योंकि जगत के ये दो प्रकार के- शुक्ल और कृष्ण अर्थात देवयान और पितृयान मार्ग सनातन माने गए हैं। इनमें एक द्वारा गया हुआ (अर्थात इसी अध्याय के श्लोक 24 के अनुसार अर्चिमार्ग से गया हुआ योगी।)-- जिससे वापस नहीं लौटना पड़ता, उस परमगति को प्राप्त होता है और दूसरे के द्वारा गया हुआ ( अर्थात इसी अध्याय के श्लोक 25 के अनुसार धूममार्ग से गया हुआ सकाम कर्मयोगी।) फिर वापस आता है अर्थात्‌ जन्म-मृत्यु को प्राप्त होता है॥26॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश
Open In App