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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन ।
    तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन ॥८- २७॥

    हे पार्थ! इस प्रकार इन दोनों मार्गों को तत्त्व से जानकर कोई भी योगी मोहित नहीं होता। इस कारण हे अर्जुन! तू सब काल में समबुद्धि रूप से योग से युक्त हो अर्थात निरंतर मेरी प्राप्ति के लिए साधन करने वाला हो॥27॥

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Krishna Kutumb
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