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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् ।
    कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ॥९- ७॥

    हे अर्जुन! कल्पों के अन्त में सब भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं अर्थात्‌ प्रकृति में लीन होते हैं और कल्पों के आदि में उनको मैं फिर रचता हूँ॥7॥

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Krishna Kutumb
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