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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः ।
    राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः ॥९- १२॥

    वे व्यर्थ आशा, व्यर्थ कर्म और व्यर्थ ज्ञान वाले विक्षिप्तचित्त अज्ञानीजन राक्षसी, आसुरी और मोहिनी प्रकृति को ही धारण किए रहते हैं॥12॥

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Krishna Kutumb
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