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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    ज्ञानयज्ञेन चाप्यन्ये यजन्तो मामुपासते ।
    एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् ॥९- १५॥

    दूसरे ज्ञानयोगी मुझ निर्गुण-निराकार ब्रह्म का ज्ञानयज्ञ द्वारा अभिन्नभाव से पूजन करते हुए भी मेरी उपासना करते हैं और दूसरे मनुष्य बहुत प्रकार से स्थित मुझ विराट स्वरूप परमेश्वर की पृथक भाव से उपासना करते हैं।।15।।

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Krishna Kutumb
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