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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्णाम्युत्सृजामि च ।
    अमृतं चैव मृत्युश्च सदसच्चाहमर्जुन ॥९- १९॥

    मैं ही सूर्यरूप से तपता हूँ, वर्षा का आकर्षण करता हूँ और उसे बरसाता हूँ। हे अर्जुन! मैं ही अमृत और मृत्यु हूँ और सत्‌-असत्‌ भी मैं ही हूँ॥19॥

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Krishna Kutumb
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