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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।
    तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः ॥९- २६॥

    जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ॥26॥

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Krishna Kutumb
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