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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा ।
    अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ॥९- ३३॥

    फिर इसमें कहना ही क्या है, जो पुण्यशील ब्राह्मण था राजर्षि भक्तजन मेरी शरण होकर परम गति को प्राप्त होते हैं। इसलिए तू सुखरहित और क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर निरंतर मेरा ही भजन कर॥33॥

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Krishna Kutumb
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