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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    अहिंसा समता तुष्टिस्-
    तपो दानं यशोऽयशः ।
    भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः ॥१०- ५॥

    तथा अहिंसा, समता, संतोष तप (स्वधर्म के आचरण से इंद्रियादि को तपाकर शुद्ध करने का नाम तप है), दान, कीर्ति और अपकीर्ति- ऐसे ये प्राणियों के नाना प्रकार के भाव मुझसे ही होते हैं॥5॥

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Krishna Kutumb
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