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  • अर्जुन ने श्री कृष्णा से कहा

    कथं विद्यामहं योगिंस्त्वां सदा परिचिन्तयन् ।
    केषु केषु च भावेषु चिन्त्योऽसि भगवन्मया ॥१०- १७॥

    हे योगेश्वर! मैं किस प्रकार निरंतर चिंतन करता हुआ आपको जानूँ और हे भगवन्‌! आप किन-किन भावों में मेरे द्वारा चिंतन करने योग्य हैं?॥17॥

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Krishna Kutumb
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