Loading...

  • अविनाशी स्वरूप

    मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो ।
    योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥११- ४॥

    हे प्रभो! (उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय तथा अन्तर्यामी रूप से शासन करने वाला होने से भगवान का नाम 'प्रभु' है) यदि मेरे द्वारा आपका वह रूप देखा जाना शक्य है- ऐसा आप मानते हैं, तो हे योगेश्वर! उस अविनाशी स्वरूप का मुझे दर्शन कराइए॥4॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश
Open In App