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  • परब्रह्म परमात्मा

    त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
    त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे ॥११- १८॥

    आप ही जानने योग्य परम अक्षर अर्थात परब्रह्म परमात्मा हैं। आप ही इस जगत के परम आश्रय हैं, आप ही अनादि धर्म के रक्षक हैं और आप ही अविनाशी सनातन पुरुष हैं। ऐसा मेरा मत है॥18॥

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Krishna Kutumb
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