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  • अर्जुन ने श्री कृष्णा भगवान से कहा

    यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसि विहारशय्यासनभोजनेषु ।
    एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम् ॥११- ४२॥

    आप जो मेरे द्वारा विनोद के लिए विहार, शय्या, आसन और भोजनादि में अकेले अथवा उन सखाओं के सामने भी अपमानित किए गए हैं- वह सब अपराध अप्रमेयस्वरूप अर्थात अचिन्त्य प्रभाव वाले आपसे मैं क्षमा करवाता हूँ॥42॥

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Krishna Kutumb
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