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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    श्रीभगवानुवाच -
    सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम ।
    देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः ॥११- ५२॥

    श्री भगवान बोले- मेरा जो चतुर्भज रूप तुमने देखा है, वह सुदुर्दर्श है अर्थात्‌ इसके दर्शन बड़े ही दुर्लभ हैं। देवता भी सदा इस रूप के दर्शन की आकांक्षा करते रहते हैं॥52॥

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Krishna Kutumb
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