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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः ।
    निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव ॥११- ५५॥

    हे अर्जुन! जो पुरुष केवल मेरे ही लिए सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को करने वाला है, मेरे परायण है, मेरा भक्त है, आसक्तिरहित है और सम्पूर्ण भूतप्राणियों में वैरभाव से रहित है (सर्वत्र भगवद्बुद्धि हो जाने से उस पुरुष का अति अपराध करने वाले में भी वैरभाव नहीं होता है, फिर औरों में तो कहना ही क्या है), वह अनन्यभक्तियुक्त पुरुष मुझको ही प्राप्त होता है॥55॥

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Krishna Kutumb
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