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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    ये त्वक्षरमनिर्देश्यम-
    व्यक्तं पर्युपासते ।
    सर्वत्रगमचिन्त्यं च कूटस्थमचलं ध्रुवम् ॥१२- ३॥

    परन्तु जो पुरुष इन्द्रियों के समुदाय को भली प्रकार वश में करके मन-बुद्धि से परे, सर्वव्यापी, अकथनीय स्वरूप और सदा एकरस रहने वाले, नित्य, अचल, निराकार, अविनाशी,॥3॥

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Krishna Kutumb
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