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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः ।
    अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥१२- ६॥

    परन्तु जो मेरे परायण रहने वाले भक्तजन सम्पूर्ण कर्मों को मुझमें अर्पण करके मुझ सगुणरूप परमेश्वर को ही अनन्य भक्तियोग से निरन्तर चिन्तन करते हुए भजते हैं। (इस श्लोक का विशेष भाव जानने के लिए गीता अध्याय 11 श्लोक 55 देखना चाहिए)॥6॥

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Krishna Kutumb
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