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  • दुःखों से छूटा हुआ

    अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः ।
    सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥१२- १६॥

    जो पुरुष आकांक्षा से रहित, बाहर-भीतर से शुद्ध, चतुर, पक्षपात से रहित और दुःखों से छूटा हुआ है- वह सब आरम्भों का त्यागी मेरा भक्त मुझको प्रिय है॥16॥

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Krishna Kutumb
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