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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं संघातश्चेतना धृतिः ।
    एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥१३- ६॥

    तथा इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, स्थूल देहका पिण्ड, चेतना (शरीर और अन्तःकरण की एक प्रकार की चेतन-शक्ति।) और धृति (गीता अध्याय 18 श्लोक 34 व 35 तक देखना चाहिए।)-- इस प्रकार विकारों (पाँचवें श्लोक में कहा हुआ तो क्षेत्र का स्वरूप समझना चाहिए और इस श्लोक में कहे हुए इच्छादि क्षेत्र के विकार समझने चाहिए।) के सहित यह क्षेत्र संक्षेप में कहा गया॥6॥

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Krishna Kutumb
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