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  • लोक और परलोक

    इन्द्रियार्थेषु वैराग्यम-
    नहंकार एव च ।
    जन्ममृत्युजराव्याधि दुःखदोषानुदर्शनम् ॥१३- ८॥

    इस लोक और परलोक के सम्पूर्ण भोगों में आसक्ति का अभाव और अहंकार का भी अभाव, जन्म, मृत्यु, जरा और रोग आदि में दुःख और दोषों का बार-बार विचार करना॥8॥

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Krishna Kutumb
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