Loading...

  • प्रकृति से उत्पन्न

    पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ् क्ते प्रकृतिजान्गुणान् ।
    कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥१३- २१॥

    प्रकृति में स्थित ही पुरुष प्रकृति से उत्पन्न त्रिगुणात्मक पदार्थों को भोगता है और इन गुणों का संग ही इस जीवात्मा के अच्छी-बुरी योनियों में जन्म लेने का कारण है। (सत्त्वगुण के संग से देवयोनि में एवं रजोगुण के संग से मनुष्य योनि में और तमो गुण के संग से पशु आदि नीच योनियों में जन्म होता है।)॥21॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश