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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।
    अन्ये सांख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥१३- २४॥

    उस परमात्मा को कितने ही मनुष्य तो शुद्ध हुई सूक्ष्म बुद्धि से ध्यान द्वारा हृदय में देखते हैं, अन्य कितने ही ज्ञानयोग  द्वारा और दूसरे कितने ही कर्मयोग द्वारा देखते हैं अर्थात प्राप्त करते हैं॥24॥

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Krishna Kutumb
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