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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    यदा भूतपृथग्भावमे-
    कस्थमनुपश्यति ।
    तत एव च विस्तारं ब्रह्म संपद्यते तदा ॥१३- ३०॥

    जिस क्षण यह पुरुष भूतों के पृथक-पृथक भाव को एक परमात्मा में ही स्थित तथा उस परमात्मा से ही सम्पूर्ण भूतों का विस्तार देखता है, उसी क्षण वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है॥30॥

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Krishna Kutumb
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