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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    इदं ज्ञानमुपाश्रित्य मम साधर्म्यमागताः ।
    सर्गेऽपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च ॥१४- २॥

    इस ज्ञान को आश्रय करके अर्थात धारण करके मेरे स्वरूप को प्राप्त हुए पुरुष सृष्टि के आदि में पुनः उत्पन्न नहीं होते और प्रलयकाल में भी व्याकुल नहीं होते॥2॥

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Krishna Kutumb
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