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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्-
    प्रकाशकमनामयम् ।
    सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ ॥१४- ६॥

    हे निष्पाप! उन तीनों गुणों में सत्त्वगुण तो निर्मल होने के कारण प्रकाश करने वाला और विकार रहित है, वह सुख के सम्बन्ध से और ज्ञान के सम्बन्ध से अर्थात उसके अभिमान से बाँधता है॥6॥

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Krishna Kutumb
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