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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम् ।
    तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम् ॥१४- ७॥

    हे अर्जुन! रागरूप रजोगुण को कामना और आसक्ति से उत्पन्न जान। वह इस जीवात्मा को कर्मों और उनके फल के सम्बन्ध में बाँधता है॥7॥

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Krishna Kutumb
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