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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् ।
    रजसस्तु फलं दुःखम-
    ज्ञानं तमसः फलम् ॥१४- १६॥

    श्रेष्ठ कर्म का तो सात्त्विक अर्थात् सुख, ज्ञान और वैराग्यादि निर्मल फल कहा है, राजस कर्म का फल दुःख एवं तामस कर्म का फल अज्ञान कहा है॥16॥

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