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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते ।
    गुणा वर्तन्त इत्येव योऽवतिष्ठति नेङ्गते ॥१४- २३॥

    जो साक्षी के सदृश स्थित हुआ गुणों द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता और गुण ही गुणों में बरतते (त्रिगुणमयी माया से उत्पन्न हुए अन्तःकरण सहित इन्द्रियों का अपने-अपने विषयों में विचरना ही 'गुणों का गुणों में बरतना' है) हैं- ऐसा समझता हुआ जो सच्चिदानन्दघन परमात्मा में एकीभाव से स्थित रहता है एवं उस स्थिति से कभी विचलित नहीं होता॥23॥

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Krishna Kutumb
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