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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः ।
    तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्-
    तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ॥१४- २४॥

    जो निरन्तर आत्म भाव में स्थित, दुःख-सुख को समान समझने वाला, मिट्टी, पत्थर और स्वर्ण में समान भाव वाला, ज्ञानी, प्रिय तथा अप्रिय को एक-सा मानने वाला और अपनी निन्दा-स्तुति में भी समान भाव वाला है॥24॥

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Krishna Kutumb
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