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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    मानापमानयोस्-
    तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः ।
    सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः स उच्यते ॥१४- २५॥

    जो मान और अपमान में सम है, मित्र और वैरी के पक्ष में भी सम है एवं सम्पूर्ण आरम्भों में कर्तापन के अभिमान से रहित है, वह पुरुष गुणातीत कहा जाता है॥25॥

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