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  • प्राणियों के हृदय में अन्तर्यामी रूप से स्थित

    द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च ।
    क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते ॥१५- १६॥

    इस संसार में नाशवान और अविनाशी भी ये दो प्रकार के पुरुष हैं। इनमें सम्पूर्ण भूतप्राणियों के शरीर तो नाशवान और जीवात्मा अविनाशी कहा जाता है॥16॥

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Krishna Kutumb
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