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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुराः ।
    न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते ॥१६- ७॥

    आसुर स्वभाव वाले मनुष्य प्रवृत्ति और निवृत्ति- इन दोनों को ही नहीं जानते। इसलिए उनमें न तो बाहर-भीतर की शुद्धि है, न श्रेष्ठ आचरण है और न सत्य भाषण ही है॥7॥

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Krishna Kutumb
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