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  • अज्ञान से मिथ्या

    काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः ।
    मोहाद् गृहीत्वासद्ग्राहान्-
    प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः ॥१६- १०॥

    वे दम्भ, मान और मद से युक्त मनुष्य किसी प्रकार भी पूर्ण न होने वाली कामनाओं का आश्रय लेकर, अज्ञान से मिथ्या सिद्धांतों को ग्रहण करके भ्रष्ट आचरणों को धारण करके संसार में विचरते हैं॥10॥

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