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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः ।
    कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥१६- ११॥

    तथा वे मृत्युपर्यन्त रहने वाली असंख्य चिन्ताओं का आश्रय लेने वाले, विषयभोगों के भोगने में तत्पर रहने वाले और 'इतना ही सुख है' इस प्रकार मानने वाले होते हैं॥11॥

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