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  • धनी और बड़े कुटुम्ब वाला

    असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि ।
    ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी ॥१६- १४॥

    वे सोचा करते हैं कि मैंने आज यह प्राप्त कर लिया है और अब इस मनोरथ को प्राप्त कर लूँगा। मेरे पास यह इतना धन है और फिर भी यह हो जाएगा॥14॥

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Krishna Kutumb
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