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  • अपवित्र नरक में गिरते हैं

    आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया ।
    यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः ॥१६- १५॥

    मैं बड़ा धनी और बड़े कुटुम्ब वाला हूँ। मेरे समान दूसरा कौन है? मैं यज्ञ करूँगा, दान दूँगा और आमोद-प्रमोद करूँगा। इस प्रकार अज्ञान से मोहित रहने वाले,॥15॥

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Krishna Kutumb
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