Loading...

  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    आत्मसंभाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः ।
    यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् ॥१६- १७॥

    वे अपने-आपको ही श्रेष्ठ मानने वाले घमण्डी पुरुष धन और मान के मद से युक्त होकर केवल नाममात्र के यज्ञों द्वारा पाखण्ड से शास्त्रविधिरहित यजन करते हैं॥17॥

    |0|0