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  • श्रद्धात्रयविभागयोगः अर्जुन उवाच

    श्रद्धात्रयविभागयोगः

    अर्जुन उवाच -
    ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः ।
    तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः ॥१७- १॥

    अर्जुन बोले- हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त हुए देवादिका पूजन करते हैं, उनकी स्थिति फिर कौन-सी है? सात्त्विकी है अथवा राजसी किंवा तामसी?॥1॥

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Krishna Kutumb
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