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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    कट् वम्ललवणात्युष्ण-
    तीक्ष्णरूक्षविदाहिनः ।
    आहारा राजसस्येष्टा- दुःखशोकामयप्रदाः ॥१७- ९॥

    कड़वे, खट्टे, लवणयुक्त, बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक और दुःख, चिन्ता तथा रोगों को उत्पन्न करने वाले आहार अर्थात्‌ भोजन करने के पदार्थ राजस पुरुष को प्रिय होते हैं॥9॥

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Krishna Kutumb
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