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  • वह सात्त्विक है

    अफलाकाङ्क्षिभिर्यज्ञो विधिदृष्टो य इज्यते ।
    यष्टव्यमेवेति मनः समाधाय स सात्त्विकः ॥१७- ११॥

    जो शास्त्र विधि से नियत, यज्ञ करना ही कर्तव्य है- इस प्रकार मन को समाधान करके, फल न चाहने वाले पुरुषों द्वारा किया जाता है, वह सात्त्विक है॥11॥

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Krishna Kutumb
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