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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम् ।
    श्रद्धाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते ॥१७- १३॥

    शास्त्रविधि से हीन, अन्नदान से रहित, बिना मन्त्रों के, बिना दक्षिणा के और बिना श्रद्धा के किए जाने वाले यज्ञ को तामस यज्ञ कहते हैं॥13॥

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