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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    श्रद्धया परया तप्तं तपस्-
    तत्त्रिविधं नरैः ।
    अफलाकाङ्क्षिभिर्युक्तैः सात्त्विकं परिचक्षते ॥१७- १७॥

    फल को न चाहने वाले योगी पुरुषों द्वारा परम श्रद्धा से किए हुए उस पूर्वोक्त तीन प्रकार के तप को सात्त्विक कहते हैं॥17॥

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Krishna Kutumb
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