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  • शरीर की पीड़ा

    मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः ।
    परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ॥१७- १९॥

    जो तप मूढ़तापूर्वक हठ से, मन, वाणी और शरीर की पीड़ा के सहित अथवा दूसरे का अनिष्ट करने के लिए किया जाता है- वह तप तामस कहा गया है॥19॥

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Krishna Kutumb
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