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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    यज्ञे तपसि दाने च स्थितिः सदिति चोच्यते ।
    कर्म चैव तदर्थीयं सदित्येवाभिधीयते ॥१७- २७॥

    तथा यज्ञ, तप और दान में जो स्थिति है, वह भी 'सत्‌' इस प्रकार कही जाती है और उस परमात्मा के लिए किया हुआ कर्म निश्चयपूर्वक सत्‌-ऐसे कहा जाता है॥27॥

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Krishna Kutumb
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