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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    अश्रद्धया हुतं दत्तं तपस्-
    तप्तं कृतं च यत् ।
    असदित्युच्यते पार्थ न च तत्प्रेत्य नो इह ॥१७- २८॥

    हे अर्जुन! बिना श्रद्धा के किया हुआ हवन, दिया हुआ दान एवं तपा हुआ तप और जो कुछ भी किया हुआ शुभ कर्म है- वह समस्त 'असत्‌'- इस प्रकार कहा जाता है, इसलिए वह न तो इस लोक में लाभदायक है और न मरने के बाद ही॥28॥

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Krishna Kutumb
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