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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत् ।
    यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम् ॥१८- ५॥

    यज्ञ, दान और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं है, बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य है, क्योंकि यज्ञ, दान और तप -ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पुरुषों को  पवित्र करने वाले हैं॥5॥

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Krishna Kutumb
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