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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत् ।
    स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत् ॥१८- ८॥

    जो कुछ कर्म है वह सब दुःखरूप ही है- ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे, तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता॥8॥

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Krishna Kutumb
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