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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    शरीरवाङ् मनोभिर्यत्-
    कर्म प्रारभते नरः ।
    न्याय्यं वा विपरीतं वा पञ्चैते तस्य हेतवः ॥१८- १५॥

    मनुष्य मन, वाणी और शरीर से शास्त्रानुकूल अथवा विपरीत जो कुछ भी कर्म करता है- उसके ये पाँचों कारण हैं॥15॥

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