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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    नियतं सङ्गरहितम रागद्वेषतः कृतम् ।
    अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते ॥१८- २३॥

    जो कर्म शास्त्रविधि से नियत किया हुआ और कर्तापन के अभिमान से रहित हो तथा फल न चाहने वाले पुरुष द्वारा बिना राग-द्वेष के किया गया हो- वह सात्त्विक कहा जाता है॥23॥

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